कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान का अध्याय 6 “भारतीय सभ्यता का प्रारंभ” हमें प्राचीन भारत की सबसे पुरानी और विकसित सभ्यता के बारे में जानकारी देता है। यह सभ्यता लगभग 2600 ईसा पूर्व के आसपास विकसित हुई और इसे सिंधु घाटी सभ्यता कहा जाता है। यह सभ्यता उस समय की सबसे उन्नत सभ्यताओं में से एक मानी जाती है। सिंधु घाटी सभ्यता भारतीय इतिहास की प्रारंभिक और महत्वपूर्ण सभ्यता थी। इसकी उन्नत नगर योजना, व्यापार और संस्कृति से हमें यह पता चलता है कि हजारों वर्ष पहले भी लोग संगठित और विकसित समाज में रहते थे। यह अध्याय हमें भारत की प्राचीन विरासत को समझने में सहायता करता है।
Table of Contents
प्रश्न, क्रियाकलाप और परियोजनाएँ
प्रश्न 1. इस अध्याय में अध्ययन की गई सभ्यता के अनेक नाम क्यों हैं? इनके महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर :
इस अध्याय में अध्ययन की गई सभ्यता के अनेक नाम इसलिए हैं क्योंकि इसकी खोज अलग-अलग स्थानों पर हुई और इसका विस्तार बहुत बड़े क्षेत्र में था। इस सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता कहा गया क्योंकि हड़प्पा पहला नगर था जिसकी खुदाई की गई। इसे सिंधु सभ्यता भी कहा गया क्योंकि इसके अनेक नगर सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे बसे थे। बाद में यह पता चला कि इस सभ्यता के कई स्थल सरस्वती नदी क्षेत्र में भी फैले हुए थे, इसलिए इसे सिंधु-सरस्वती सभ्यता कहा गया। इन नामों से इस सभ्यता के विशाल भौगोलिक विस्तार और खोज के इतिहास का महत्व स्पष्ट होता है।
प्रश्न 2. सिंधु-सरस्वती सभ्यता की उपलब्धियों का सार देते हुए 150 से 200 शब्दों की संक्षिप्त रिपोर्ट लिखिए।
उत्तर :
सिंधु-सरस्वती सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन और विकसित सभ्यताओं में से एक थी। इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि इसकी उत्कृष्ट नगर-योजना थी। इसके नगर सुव्यवस्थित थे, जिनमें चौड़ी और सीधी सड़कें थीं। मकान पक्की ईंटों से बने होते थे और लगभग हर घर में स्नानघर तथा भूमिगत नालियों की व्यवस्था थी।
जल-प्रबंधन इस सभ्यता की एक महत्वपूर्ण विशेषता थी। कुएँ, नालियाँ और बड़े जलाशय बनाए गए। धौलावीरा में विशाल जलाशयों की प्रणाली इसका प्रमुख उदाहरण है। कृषि अत्यंत उन्नत थी। लोग गेहूँ, जौ, बाजरा, दालें और कपास उगाते थे। पशुपालन और मछली पकड़ना भी किया जाता था।
हड़प्पावासी कुशल कारीगर थे। वे ताँबा, कांसा, पत्थर और मिट्टी से औज़ार, बर्तन, आभूषण, मुहरें और मूर्तियाँ बनाते थे। व्यापार भी बहुत सक्रिय था और स्थल, नदी तथा समुद्री मार्गों का उपयोग किया जाता था। यह सभ्यता एक संतुलित, सुव्यवस्थित और उन्नत समाज को दर्शाती है।
प्रश्न 3. कल्पना कीजिए कि आपको हड़प्पा से कालीबंगा तक यात्रा करनी है। आपके पास विभिन्न विकल्प क्या हैं? प्रत्येक विकल्प में लगने वाले समय का अनुमान लगाइए।
उत्तर :
हड़प्पा से कालीबंगा तक यात्रा करने के दो मुख्य विकल्प थे। पहला विकल्प नदी मार्ग था, जिसमें सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों का उपयोग किया जाता था। इस मार्ग से यात्रा करने में कई दिन लग सकते थे। दूसरा विकल्प स्थल मार्ग था, जिसमें लोग पैदल या बैलगाड़ी से व्यापारिक रास्तों पर चलते थे। इस मार्ग से यात्रा करने में कुछ सप्ताह लग सकते थे। ये दोनों मार्ग उस समय सामान्य रूप से उपयोग किए जाते थे।
प्रश्न 4. कल्पना कीजिए कि यदि हड़प्पा के किसी पुरुष या महिला को हम आज के भारत के सामान्य रसोईघर में ले आते हैं, तो उन्हें सबसे बड़े चार या पाँच आश्चर्य क्या लगेंगे?
उत्तर :
हड़प्पावासी को गैस चूल्हा और बिजली से चलने वाले उपकरण देखकर आश्चर्य होगा। आधुनिक धातुओं से बने बर्तन उसके लिए नए होंगे। भोजन को सुरक्षित रखने के लिए फ्रिज का उपयोग उसे चकित करेगा। पैक किया हुआ भोजन और आधुनिक रसोई के उपकरण भी उसे आश्चर्यजनक लगेंगे। हालाँकि गेहूँ, दालें, दुग्ध-पदार्थ, हल्दी और अदरक जैसे खाद्य पदार्थ उसे परिचित लगेंगे।
प्रश्न 5. इस अध्याय के सभी चित्रों को देखकर उन आभूषणों, हाव-भावों और वस्तुओं की सूची बनाइए, जो आज भी परिचित प्रतीत होती हैं।
उत्तर :
चूड़ियाँ, मनके (मालाएँ), कंघी, दर्पण, बर्तन, हल (प्लाउ), खिलौने, खेल, भंडारण पात्र और ‘नमस्ते’ की मुद्रा आज भी 21वीं शताब्दी में परिचित प्रतीत होती हैं।
प्रश्न 6. धौलावीरा के जलाशयों की प्रणाली क्या सोच प्रतिबिंबित करती है?
उत्तर :
धौलावीरा के जलाशयों की प्रणाली सावधानीपूर्वक योजना, सामूहिक सहयोग और जल संरक्षण की सोच को प्रतिबिंबित करती है। यह दर्शाती है कि वहाँ संगठित प्रशासन था और सार्वजनिक आवश्यकताओं को बहुत महत्व दिया जाता था।
प्रश्न 7. मोहनजोदड़ो में ईंटों से निर्मित लगभग 700 कुएँ मिले हैं। इनके निहितार्थों पर चर्चा कीजिए।
उत्तर :
मोहनजोदड़ो में 700 ईंटों से बने कुएँ यह दर्शाते हैं कि जल-आपूर्ति को अत्यधिक महत्व दिया जाता था। इन कुओं का नियमित रख-रखाव किया जाता था और उनका उपयोग कई शताब्दियों तक किया गया। इससे कुशल नगर प्रशासन, तकनीकी ज्ञान और स्वच्छता के प्रति जागरूकता का पता चलता है।
प्रश्न 8. सामान्यतः कहा जाता है कि हड़प्पावासियों में नागरिकता का उच्च भाव था। इस कथन के महत्व पर चर्चा कीजिए तथा वर्तमान भारत के महानगरों से इसकी तुलना कीजिए।
उत्तर :
हड़प्पावासियों में नागरिकता का उच्च भाव था। उनके नगरों में स्वच्छता, जल निकासी और सार्वजनिक सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाता था। यह अनुशासन और सामूहिक जिम्मेदारी को दर्शाता है। आज भारत के कई बड़े शहरों में कचरा प्रबंधन, जल संकट और अव्यवस्थित विकास जैसी समस्याएँ दिखाई देती हैं। इस तुलना से स्पष्ट होता है कि हड़प्पावासियों की नागरिक भावना अत्यंत विकसित थी।
