कक्षा 6 विज्ञान के पाठ 10, “सजीव विशेषताओं का अन्वेषण”, में उन मूल विशेषताओं के बारे में बताया गया है जो किसी जीव को जीवित बनाती हैं। सरल प्रश्न और उत्तर के माध्यम से विद्यार्थी इस अध्याय को आसानी से समझ सकते हैं।
Table of Contents
आइए, और अधिक सीखें
प्रश्न 1.
पौधों और जंतुओं के जीवन-चक्र में समानताओं और भिन्नताओं को सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
समानताएँ:
- पौधे और जंतु दोनों का जीवन एक छोटे रूप से शुरू होता है (बीज/अंडा)।
- दोनों समय के साथ बढ़ते और विकसित होते हैं।
- दोनों श्वसन करते हैं।
- दोनों प्रजनन करते हैं।
- दोनों की एक निश्चित आयु होती है और अंत में मृत्यु होती है।
भिन्नताएँ:
- पौधे जीवन भर बढ़ते रहते हैं, जबकि जंतु एक निश्चित आयु तक ही बढ़ते हैं।
- पौधे एक स्थान पर स्थिर रहते हैं, जबकि जंतु चल-फिर सकते हैं।
- पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, जबकि जंतु भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं।
प्रश्न 2.
नीचे तालिका में कुछ विवरण (डाटा) दिया गया है। तालिका का अध्ययन कीजिए और दूसरे व तीसरे स्तंभ में दी गई स्थितियों के लिए उपयुक्त उदाहरणों का पता लगाने का प्रयास कीजिए। यदि आपको लगता है कि नीचे दी गई किसी भी स्थिति के लिए उदाहरण संभव नहीं है, तो स्पष्ट कीजिए कि ऐसा क्यों है।
(1) क्या इसकी वृद्धि होती है? – नहीं
क्या यह श्वास लेता है? – नहीं
उदाहरण: पत्थर
टिप्पणी: पत्थर न बढ़ता है और न श्वसन करता है, इसलिए यह निर्जीव है।
(2) क्या इसकी वृद्धि होती है? – नहीं
क्या यह श्वास लेता है? – हाँ
उदाहरण: सूखा बीज
टिप्पणी: सूखा बीज बहुत धीमी गति से श्वसन करता है, परंतु अनुकूल परिस्थितियों के बिना वृद्धि नहीं करता।
(3) क्या इसकी वृद्धि होती है? – हाँ
क्या यह श्वास लेता है? – नहीं
उदाहरण: ऐसा कोई उदाहरण संभव नहीं है।
टिप्पणी: वृद्धि के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है और ऊर्जा श्वसन से मिलती है। इसलिए बिना श्वसन के वृद्धि संभव नहीं है।
(4) क्या इसकी वृद्धि होती है? – हाँ
क्या यह श्वास लेता है? – हाँ
उदाहरण: मनुष्य / पौधा / पशु
टिप्पणी: यह सजीव है क्योंकि यह बढ़ता भी है और श्वसन भी करता है।
प्रश्न 3.
आपने सीखा है कि बीजों के अंकुरण के लिए भिन्न-भिन्न परिस्थितियों की आवश्यकता होती है। अनाजों और दालों के उपयुक्त भंडारण के लिए हम इस ज्ञान का उपयोग किस प्रकार कर सकते हैं?
उत्तर:
बीजों को अंकुरित होने के लिए जल, वायु और उचित तापमान की आवश्यकता होती है।
इसलिए अनाज और दालों के भंडारण के लिए:
- उन्हें सूखे स्थान पर रखना चाहिए।
- उन्हें वायुरुद्ध (एयरटाइट) डिब्बों में रखना चाहिए।
- ठंडी जगह पर संग्रहित करना चाहिए।
इससे बीज अंकुरित नहीं होंगे और लंबे समय तक सुरक्षित रहेंगे।
प्रश्न 4.
आपने सीखा है कि टैडपोल की एक पूँछ होती है लेकिन जब वृद्धि के बाद यह मेंढक बनता है तो पूँछ लुप्त हो जाती है। टैडपोल अवस्था में पूँछ होने से क्या लाभ मिलता है?
उत्तर:
टैडपोल जल में रहता है और पूँछ की सहायता से तैरता है।
पूँछ से उसे ये लाभ मिलते हैं:
- जल में चलने-फिरने में सहायता मिलती है।
- शत्रुओं से बचाव होता है।
- भोजन खोजने में सहायता मिलती है।
जब वह मेंढक बनता है, तब उसके पैर विकसित हो जाते हैं और पूँछ की आवश्यकता नहीं रहती, इसलिए वह समाप्त हो जाती है।
प्रश्न 5.
चरण का कहना है लकड़ी का लट्ठा निर्जीव है क्योंकि इसमें गति नहीं होती। इसके विपरीत चारु इसे सजीव मानती हैं, क्योंकि यह वृक्षों से प्राप्त होता है। चरण और चारु के कथनों के पक्ष या विपक्ष में अपने तर्क दीजिए।
उत्तर:
चरण का कथन सही है क्योंकि लकड़ी का लट्ठा:
- वृद्धि नहीं करता।
- श्वसन नहीं करता।
- प्रजनन नहीं करता।
इसलिए वह निर्जीव है।
चारु का कथन सही नहीं है क्योंकि लकड़ी भले ही जीवित वृक्ष से प्राप्त हुई हो, परंतु कटने के बाद उसमें जीवन की कोई विशेषता नहीं रहती।
प्रश्न 6.
मच्छर और मेंढक के जीवन-चक्र में क्या समानताएँ और क्या विभेदकारी विशेषताएँ होती हैं?
उत्तर:
समानताएँ:
- दोनों अंडे देते हैं।
- दोनों में कायांतरण (Metamorphosis) होता है।
- दोनों का प्रारंभिक जीवन जल में होता है।
विभेदकारी विशेषताएँ:
मच्छर का जीवन-चक्र:
अंडा → लार्वा → प्यूपा → वयस्क
मेंढक का जीवन-चक्र:
अंडा → टैडपोल → वयस्क
मच्छर में चार अवस्थाएँ होती हैं, जबकि मेंढक में तीन मुख्य अवस्थाएँ होती हैं।
प्रश्न 7.
एक पौधे को उसकी वृद्धि के लिए उपयुक्त सभी स्थितियाँ उपलब्ध कराई गई हैं (चित्र 10.9)। एक सप्ताह पश्चात आप इस पौधे के प्रारोह और जड़ में क्या देखने की अपेक्षा करते हैं? इसके कारण भी लिखिए।
उत्तर:
एक सप्ताह बाद:
- प्ररोह (तना) ऊपर की ओर बढ़ेगा।
- जड़ नीचे की ओर बढ़ेगी।
कारण:
- तना प्रकाश की ओर बढ़ता है (प्रकाशानुवर्तन)।
- जड़ गुरुत्वाकर्षण की दिशा में बढ़ती है (गुरुत्वानुवर्तन)।
प्रश्न 8.
तारा और विजय ने एक प्रयोग का सेट-अप तैयार किया है जिसे चित्र 10.10 में दर्शाया गया है। आप क्या सोचते हैं कि वे क्या पता करना चाहते हैं? और उन्हें यह कैसे पता चलेगा कि वे सही हैं?
उत्तर:
वे यह जानना चाहते हैं कि बीज अंकुरण के लिए वायु आवश्यक है या नहीं।
यदि:
- वायु प्राप्त करने वाले बीज अंकुरित होंगे।
- वायु न मिलने वाले बीज अंकुरित नहीं होंगे।
तो उनका निष्कर्ष सही सिद्ध होगा।
प्रश्न 9.
बीज अंकुरण पर तापमान के प्रभाव की जाँच करने के लिए एक प्रयोग की योजना लिखिए।
उत्तर:
प्रयोग की विधि:
- दो समान प्रकार के बीज लें।
- एक समूह को गर्म स्थान पर रखें।
- दूसरे समूह को ठंडे स्थान पर रखें।
- दोनों को समान मात्रा में जल और वायु दें।
- कुछ दिनों तक अवलोकन करें।
परिणाम:
गर्म स्थान के बीज जल्दी अंकुरित होंगे, जबकि ठंडे स्थान के बीज अंकुरित नहीं होंगे या बहुत धीमे होंगे।
निष्कर्ष:
उचित तापमान बीज अंकुरण के लिए आवश्यक है।
