कक्षा 6 SST का पाठ 3 “स्थलरूप एवं जीवन” हमें यह समझाता है कि पृथ्वी के विभिन्न स्थलरूप (Landforms) जैसे पर्वत, पठार और मैदान मानव जीवन को किस प्रकार प्रभावित करते हैं। प्राकृतिक वातावरण के अनुसार लोगों का रहन-सहन, भोजन, वेशभूषा और व्यवसाय बदलते रहते हैं। यह पाठ हमें सिखाता है कि स्थलरूप मानव जीवन को गहराई से प्रभावित करते हैं। प्रकृति के अनुसार लोग अपने जीवन को ढालते हैं। पर्वत, पठार और मैदान सभी मानव सभ्यता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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मेरा कस्बा/गाँव/नगर मैदान (मैदानी क्षेत्र) में स्थित है।
मैदान समतल और उपजाऊ भूमि होते हैं। यहाँ कृषि करना आसान होता है। मेरे आस-पास खेत, सड़कें, घर, बाजार और नदी दिखाई देती है। यहाँ धान, गेहूँ आदि फसलें उगाई जाती हैं। जनसंख्या भी अधिक है क्योंकि मैदान रहने और खेती के लिए अनुकूल होते हैं।
इस यात्रा में हमें तीन प्रमुख स्थलरूप दिखाई देते हैं—
→ हिमालय गोल शिखरों वाली नवीन पर्वत श्रृंखला है।
गलत
→ पठार प्रायः एक ओर से उठे हुए होते हैं।
सही
→ पर्वत और पहाड़ियाँ एक ही प्रकार के स्थलरूप हैं।
सही
→ भारत में पर्वत, पठार और नदियों में एक ही प्रकार के वनस्पति और प्राणी जगत पाए जाते है।
गलत
→ गंगा, यमुना की सहायक नदी है।
गलत
→ मरुस्थल का वनस्पति जगत और प्राणी जगत विलक्षण होता है।
सही
→ हिम के पिघलने से नदियों में जल आता है।
सही
→ मैदानों में नदियों द्वारा एकत्र किए गए तलछट भूमि को उपजाऊ बनाते हैं।
सही
→ सभी मरुस्थल गर्म होते हैं।
गलत
एवरेस्ट गिरिशृंग — पर्वतारोहण
राफ्टिंग — नदी
ऊँट — मरुस्थल
पठार — विश्व की छत
गंगा का मैदान — धान के खेत
जलमार्ग — गंगा
किलिमंजारो गिरिशृंग — अफ्रीका
यमुना — सहायक नदी
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